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AAP में बड़ी टूट! राघव चड्ढा का इस्तीफा BJP में शामिल होने का ऐलान 2/3 सांसदों के साथ जाने का दावा

AAP में बड़ी टूट! राघव चड्ढा का इस्तीफा BJP में शामिल होने का ऐलान 2/3 सांसदों के साथ जाने का दावा

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ा झटका देते हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होंगे और उनके साथ राज्यसभा में AAP के करीब दो-तिहाई सांसद भी जाएंगे। यह घटनाक्रम अरविंद केजरीवाल के लिए राजनीतिक रूप से बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

राघव चड्ढा ने दावा किया कि AAP के 10 राज्यसभा सांसदों में से अधिकतर उनके साथ हैं और उन्होंने संविधान के प्रावधानों के तहत BJP में विलय का फैसला लिया है। उनके साथ अशोक मित्तल और संदीप पाठक भी मंच पर मौजूद थे। चड्ढा ने कहा कि इस फैसले की जानकारी राज्यसभा चेयरमैन को भी दे दी गई है।

किन नेताओं का नाम आया सामने

चड्ढा ने बताया कि हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रम साहनी भी इस फैसले का हिस्सा हैं। हालांकि इन नेताओं की तरफ से आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग स्तर पर आना बाकी है, लेकिन अगर यह दावा सही साबित होता है तो AAP के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा नुकसान हो सकता है।

क्यों छोड़ी AAP ? वजह

राघव चड्ढा ने अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि AAP अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। उनके शब्दों में, “मैं गलत पार्टी में सही व्यक्ति था।” उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अब ईमानदार राजनीति से दूर हो गई है और निजी स्वार्थ हावी हो गए हैं।

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उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास दो ही रास्ते थे—या तो राजनीति छोड़ दें या फिर अपनी ऊर्जा और अनुभव के साथ “पॉजिटिव पॉलिटिक्स” करें। इसी वजह से उन्होंने BJP में जाने का फैसला लिया।

पहले से चल रहा था विवाद

गौरतलब है कि अप्रैल की शुरुआत में AAP ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटा दिया था। पार्टी ने उन पर आरोप लगाया था कि वह संसद में केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख नहीं अपनाते और “सॉफ्ट लाइन” लेते हैं। वहीं चड्ढा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि वह केवल जनता के मुद्दे उठाने पर ध्यान देते हैं, न कि हंगामा करने पर।

ED रेड का भी जुड़ा एंगल

इस पूरे घटनाक्रम में अशोक मित्तल का नाम भी चर्चा में है। हाल ही में उनके जालंधर स्थित आवास पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की थी। मित्तल लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के संस्थापक हैं और यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी बताई गई थी। हालांकि इस मामले में आधिकारिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।

AAP के लिए क्या मायने ?

अगर दो-तिहाई सांसदों के BJP में जाने का दावा सही बैठता है, तो राज्यसभा में AAP की स्थिति काफी कमजोर हो सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे पार्टी की राष्ट्रीय छवि और संगठनात्मक मजबूती पर असर पड़ेगा।

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साथ ही, यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब AAP पहले से ही कई राजनीतिक और कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे में पार्टी के अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आना भविष्य की रणनीति पर सवाल खड़े करता है।

BJP को क्या फायदा ?

दूसरी ओर, BJP के लिए यह एक बड़ा राजनीतिक लाभ माना जा रहा है। अगर इतने सांसद एक साथ जुड़ते हैं, तो उच्च सदन में पार्टी की ताकत और बढ़ेगी। सूत्रों के मुताबिक, राघव चड्ढा को भविष्य में सरकार में कोई बड़ी जिम्मेदारी भी मिल सकती है, हालांकि इस पर आधिकारिक बयान नहीं आया है

फिलहाल नजर इस बात पर है कि बाकी सांसदों की ओर से क्या आधिकारिक पुष्टि आती है और AAP इस पूरे घटनाक्रम पर क्या प्रतिक्रिया देती है। आने वाले दिनों में यह मामला और गर्मा सकता है, क्योंकि यह सिर्फ पार्टी बदलने का मुद्दा नहीं बल्कि दिल्ली की राजनीति की दिशा बदलने वाला कदम भी हो सकता है।

 

Admin Desk

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